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जले चेहरे वाले लोगों के लिए फरिश्ता बन गई है यह महिला

Posted On: 15 Jan, 2015 Others में

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गिर कर संभलना और फिर संभलने के बाद खुद अपनी ही चोट का मरहम बनना…. ऐसा करने के लिए बेहद आत्मविश्वास और साहस की जरूरत पड़ती है. यह हर किसी के बस की बात नहीं है. लेकिन एक महिला ऐसी हैं जिन्होंने ना केवल यह कारनाम कर के दिखाया है बल्कि उनकी हिम्मत ने समाज के सामने एक मिसाल कायम की है. यह हैं ‘टैटू फेयरी’ नाम से मशहूर बस्मा हमीद.


basma hameed



अब आप सोच रहे होंगे कि बस्मा ऐसा क्या करती हैं जो इनका इस तरह का नाम पड़ गया है. दरअसल बस्मा एक ऐसी दुकान चलाती हैं जहां वे खुद लोगों के शरीर पर टैटू, जिसे भारतीय संस्कृति में गोदना भी कहा जाता है, उसे बनाती हैं. लेकिन इसमें ऐसा क्या खास है जो लोगों ने उन्हें टैटू फेयरी यानी कि टैटू बनाने वाले फरिश्ते का नाम दिया है?


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इसके पीछे एक बहुत बड़ा कारण है. यह तब की बात है जब बस्मा महज तीन वर्ष की आयु की थी और रसोई घर में एक दुर्घटना का शिकार हो गई थी. उस दुर्घटना में बस्मा का चेहरे का एक बड़ा हिस्सा बुरी तरह से जल गया. यदि वैज्ञानिक भाषा में कहें तो इसे थर्ड डिग्री बर्न का नाम दिया जाता है.


basma hameed child



खैर यह तो दुर्घटना थी लेकिन अपने जले हुए चेहरे को बस्मा किसी भी हाल में ठीक करना चाहती थीं जिसके लिए उन्होंने एक या दो नहीं, बल्कि कुल 100 सर्जरियां कराई, लेकिन नतीजा कुछ खास ना निकला. तमाम सर्जरियां करने के बाद डॉक्टरों ने भी हाथ खड़े कर दिये कि वे इसके आगे कुछ नहीं कर पाएंगे.


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16 वर्ष की आयु तक बस्मा का चेहरा इन सर्जरियों के बाद कुछ ठीक तो हुआ लेकिन फिर भी उसके चहरे पर लाल रंग के धब्बे काफी बुरे लगते थे. इन हालातों के चलते कोई भी अपनी हिम्मत हार कर घर बैठ जाए लेकिन बस्मा ने किस्मत के हाथों हार नहीं मानी और चल पड़ी जीवन के इस संघर्ष के खिलाफ लड़ने.


basma hameed before after



अपने चेहरे का इलाज ढूंढ़ते-ढूंढ़ते बस्मा ने कुछ ऐसा खोज डाला जिसकी किसी ने कल्पना भी नहीं की होगी. पैरा-मैडिकल टैटू कला, एक ऐसी तकनीक जिसकी मदद से शरीर पर आए भयानक निशान को भरा जा सकता है. यह एक तरह की चित्र गोदने वाली तकनीक है जिसके जरिये रंगों का आकार-रूप देते हुए एक विशेष धब्बे को अलग ही रूप दिया जा सकता है.


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बस्मा ने इस तकनीक को खुद पर आजमाया और उसकी कोशिश सफल हुई. उसके चेहरे के निशान ना केवल कम हो गए बल्कि ऐसा प्रतीत होने लगा कि शायद यह दाग थे ही नहीं. इस तकनीक ने बस्मा को ना केवल एक नया चेहरा दिया बल्कि साथ ही एक नई जिंदगी भी दी.



basma hameed clinic



आज अपनी इस नई जिंदगी से प्रेरण लेने वाली बस्मा और लोगों को भी खुशियां बांट रही है. जानना चाहेंगे कैसे? बस्मा ने खुद के नाम से ‘बस्मा हमीद क्लिनिक’ खोला है जहां वो किसी कारण जल जाने या दुर्घटना में ग्रस्त हुई शरीर की त्वचा को इसी पैरा-मैडिकल टैटू कला से ठीक करती हैं.


किसी समय पर खुद की जिंदगी से परेशान हो चुकी बस्मा आज लाखों लोगों को अपनी इस कला से जीने का जरिया दे रही हैं. हम उनके इस जज्बे को दिल से सलाम करते हैं और उन्हें आगे भी इसी तरह से हिम्मत से काम करने के लिए प्रोत्साहित करते हैं. Next….


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yamunapathak के द्वारा
January 15, 2015

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