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कैसे कहूं कि मैं बलात्कार पीड़िता हूं !

Posted On: 4 Mar, 2014 social issues में

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समाज द्वारा बनाई गई किताब में महिला नाम का एक चैप्टर है और इस चैप्टर में महिला को इंसाफ मिलते हुए दिखाया गया हो या नहीं पर हां, उसकी दुखभरी कहानी सुनाकर लोगों को इतना जरूर बताया गया है कि ‘महिला नाम का दूसरा अर्थ ही लाचारी है’. आजकल मार्केट में पब्लिक को इमोशनल टच देने के लिए कुछ ऐसे शो आ गए हैं जो यह दावा करते हैं कि वो महिलाओं के हित की बात करते हैं और उनके द्वारा दिखाई गई रियल लाइफ की कहानियों से समाज में बदलाव जरूर होगा.


rape cases in india (article photo)इस हफ्ते ‘सत्यमेव जयते’ कार्यक्रम में बलात्कार से पीड़ित महिलाओं की दास्तां दिखाई गई और साथ ही उन बातों का भी जिक्र किया गया जो बलात्कार से पीड़ित महिलाओं को इंसाफ दिलाने के रास्ते में बाधा बनती हैं. जब बलात्कार से पीड़ित महिला एफआईआर दर्ज कराने पहुंचती है तो कैसे पुलिस अधिकारी उसकी एफआईआर दर्ज करने से मना कर देता है और यदि कुछ महिलाओं की एफआईआर दर्ज हो भी जाती है तो कैसे उन्हें कोर्ट द्वारा इंसाफ मिलने में देरी हो जाती है. हालांकि इन विषयों में कुछ भी नया नहीं है. रोज सुबह हमारे घर आए अखबार के किसी ना किसी पेज पर बलात्कार से पीड़ित महिला की कहानी का जिक्र मिल जाता है. इसके बावजूद भी आज तक बलात्कार की घटनाओं में कमी नहीं आई है क्योंकि हर रोज एक नई बलात्कार की घटना सुनाई देती है और पुरानी घटनाएं दिल-दिमाग दोनों से ही गायब हो जाती हैं. एक सर्वे के अनुसार, 16 दिसंबर की रात हुई ‘निर्भया’ जैसी घटनाएं लोगों को आज भी याद हैं और वो इसका श्रेय कुछ मीडिया हाउस द्वारा किए गए शोर-शराबे को देना चाहते हैं.

पहले बलात्कार फिर शादी यह कैसी प्रताड़ना है ?


‘सत्यमेव जयते’ कार्यक्रम में महिलाओं से जुड़े कानूनों की बात की गई और बताया गया कि सुप्रीम कोर्ट के अनुसार, ‘टू फिंगर टेस्ट’ को बलात्कार से पीड़ित महिला की गरिमा के भीतर ही करने का प्रावधान है पर यह नहीं बताया गया कि महिला की गरिमा का मापदंड क्या है?


‘वन स्टॉप क्राइसिस सेंटर’ की बात की गई जिसके भीतर बलात्कार से पीड़ित महिला की एफआईआर से लेकर और केस को कोर्ट तक पहुंचाने का कार्य किया जाएगा पर यह बात स्पष्ट नहीं की गई कि जिस समाज में बलात्कार से पीड़ित महिला एफआईआर दर्ज कराने में ही डरती है क्या वो ऐसे में ‘वन स्टॉप क्राइसिस सेंटर’ जाकर उसके साथ हुए दुर्व्यवहार की कहानी बता पाएगी.

आखिरकार क्या हुआ था 16 दिसंबर की रात ?


rape cases in indiaन्याय और कानून के लिए स्थान तब ही बन पाता है जब महिला स्वयं अपने साथ हुए दुर्व्यवहार के लिए अपनी आवाज बुलंद कर पाती है. हमारे समाज में बलात्कार के बाद बलात्कारी से ज्यादा दोषी उस महिला को माना जाता है जिसके साथ बलात्कार हुआ हो. कभी घर की लाज बचाने के लिए और कभी समाज में अपनी इज्जत बनाकर रखने के लिए बलात्कार पीड़िता को चुप रहने के लिए कहा जाता है. हमारे समाज में तो बहुत बार ऐसी स्थिति भी देखी गई है जब बलात्कार पीड़िता का पिता ही उसे कहता है कि ‘बेटी एक तो इज्जत पहले से ही गई और अब तुझे न्याय दिलाने में कहीं रही सही भी इज्जत ना चली जाए. ‘सत्यमेव जयते’ शो में बलात्कार से पीड़ित महिला की दास्तां अच्छे से सुनाई गई पर वो सच्ची कहानियां उन कहानियों के बिना अधूरी थीं जिसमें एक महिला के रिश्तेदारों ने ही उसके जिस्म के साथ-साथ उसके मानसिक स्तर को रौंद डाला था.


नोट: क्या ऐसे समाज में न्याय और कानून की बात करने से पहले उन लोगों की मानसिकता बदलने की जरूरत नहीं है जो बलात्कार को केवल एक घटना मानते हैं या बलात्कारी से ज्यादा दोषी बलात्कार से पीड़ित महिला को मानते हैं? आपकी क्या राय है अपने कमेंट्स द्वारा हमें जरूर बताएं?


आरुषि ने पांच साल इंतजार किया पर जेसिका कांड….

यह मर्द बलात्कारी नहीं मानसिक रोगी हैं

‘शरीर तो बेचा था पर वेश्या बनने के लिए नहीं’



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3 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

SHRIAL SHUKLA के द्वारा
April 14, 2014

bolte hb ki “india is a great country” but realluty to kuch aur hi hai…. india aise great ni hoga…india tab great hoga, jb hun apni menatality ko badlenge…. bcz jb hum badelenge tab desh badlega….

deepakbijnory के द्वारा
March 4, 2014

इस विषय पर अपनी कविता के माध्यम से विचार प्रस्तुत करना चाहूंगा http://deepakbijnory.jagranjunction.com/2013/04/28/खून-से-सना-हर-अखबार-नजर-आता/ खून से सना हर अखबार नजर आता है हर पृष्ठ पर खबर मेँ बलात्कार नजर आता है क्या भाई क्या पडोसी चाचा हो या हो मामा विशवास का अब तो रहा न वो जमाना अपने आप मेँ हर रिश्ता दागदार नजर आता है खून से सना . . . . . . खत्म हो गये हर रिश्ते क्या दादी और क्या नाना हर बच्चे के हाथ मेँ है इंटरनेट का एक खिलौना खिलौने मेँ अश्लीलता का संसार नजर आता है खून से सना . . . . . . दीपक पाण्डे J N V नैनीताल


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