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पहले बलात्कार फिर शादी यह कैसी प्रताड़ना है ?

Posted On: 31 Jan, 2014 social issues में

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rapeयह घटना पाकिस्तान के हिन्दुओं की दुर्दशा बयान करने के लिए पर्याप्त है. सिंध प्रांत के एक गांव की 19 वर्षीया रिंकल कुमारी ने 26 मार्च को पाकिस्तान के मुख्य न्यायाधीश इफित्खार मुहम्मद चौधरी को बताया कि नवीद शाह नाम के एक आदमी ने उसका अपहरण कर लिया था. उसने अदालत से ये अपील की उसे उसकी मां के पास जाने दिया जाए. यह साहसपूर्ण अपील थी.


पाकिस्तान में हिंदू महिलाओं का अकसर अपहरण कर लिया जाता है और शादी के लिए धर्म परिवर्तन करने पर मजबूर किया जाता है. वे असहाय हैं क्योंकि उनके पास न तो कोई संस्था है और न ही अपनी रक्षा के लिए राजनैतिक प्रभाव. रिंकल ने तो अपनी साहस दिखा दी लेकिन इसकी कीमत उसके दादाजी को गोली खा कर चुकानी पड़ी. बंदूकधारी गुंडे उसके घर के आगे घूमने लगे. ये सिर्फ रिंकल की ही कहानी नहीं है बल्कि ऐसी बहुत सारी लड़कियां है जिनके साथ आए दिन ये घटना होते रहती है.

यदि ऐसा ना होता तो राह चलता मर्द मिटा लेता अपनी भूख


पाकिस्तान में सबसे ज्यादा निशाना हिंदू लड़कियों को बनाया जाता है. पहले वहां के लड़के उन्हें अपने प्यार के जाल में फंसाते हैं फिर उन्हें मजबूर करते हैं कि वो धर्म परिवर्तित करें और अगर वो ऐसा नहीं करती हैं तो उनको बहुत प्रताड़ित किया जाता है. कई बार तो हिंदू लड़कियों को जबर्दस्ती शादी कर घर लाया जाता है तब उन्हें पता चलता है कि उनके पति की पहले से तीन-तीन शादी हो चुकी है क्योंकि मुसलमानों में एक से अधिक शादी करने की इजाजत है.


पुलिस दस्तावेजों के अनुसार अकेले सिंध में हर महीने औसतन 25 हिन्दू  लड़कियां रिंकल की तरह बदनसीबी का शिकार होती हैं. इस प्रांत में पाकिस्तान की 90% हिन्दू आबादी रहती है. युवा हिन्दू लड़कियों को पहचान कर उनका अपहरण कर लिया जाता है फिर उनका बलात्कार कर जबरदस्ती धर्म परिवर्तन करा दिया जाता है. इन सब कारणों के चलते ही वहां के हिन्दू परिवार जो वर्षों से वहां रह रहे थे अब पाकिस्तान छोड़ कर भाग रहे हैं.


पाकिस्तान में हिन्दू औरतों की हालत बहुत ही दयनीय है. पाकिस्तानी प्रशासन में किसी भी हिन्दू को नहीं लिया जाता है तो फिर हिन्दुओं की रक्षा का तो सवाल ही नहीं उठता है. खास कर हिन्दू महिलाओं का तो बिल्कुल भी नहीं.

हर अत्याचार सहे पर हार नहीं मानी


वहां अगर हिदुओं को शिक्षा ग्रहण करनी है तो उन्हें हर मुसलमानी कायदे-कानून को अपनाना होगा. वहां किताबों में बच्चों को यह पढ़ाया जाता है कि यह मुल्क हिंदुओं के लिए नहीं है. उनके साथ भेदभाव करके उन्हें स्कूल से दूर रखा जाता है. हिंदुओं पर हो रहे अत्याचार के लिए जब सरकार से गुहार लगाई जाती है तो वहां की सरकार ऐसे मुद्दों पर कन्नी काटती हुई दिखाई देती है. दोष केवल पाकिस्तान की सरकार का नहीं है बल्कि भारत की सरकार का भी है. पाकिस्तान में हिंदुओं पर की जा रही यातनाएं कोई नया मुद्दा नहीं है. आजादी के बाद से ही वहां के हिदुओं पर इस तरह की यातनाएं बरपाई जा रही हैं लेकिन लगातार इस मुद्दे पर केंद्र सरकार की उदासीनता सामने आई है. 1965 के भारत-पाक युद्ध के बाद दस हजार लोग और 1971 के युद्ध के बाद करीब 90 हजार हिंदू पाकिस्तान छोड़कर अकेले राजस्थान में आए थे. पश्चिमी सीमा पर तारबंदी के बाद ये सिलसिला थम सा गया लेकिन पिछले पांच साल में हिंदू अल्पसंख्यकों के साथ उत्पीड़न के ग्राफ में अचानक तेजी आई है.


पाकिस्तान में हो रहे भेदभाव, उत्पीड़न और जबरन धर्मांतरण की कोशिशों ने एक बार फिर हिंदू अल्पसंख्यकों को थार एक्सप्रेस पकड़ने के लिए मजबूर कर दिया. आंशका है कि आने वाले दिनों में और बड़ी तादाद में हिंदू पाकिस्तान छोड़कर आ सकते हैं. पाकिस्तान से आने वाले हिंदू तीर्थस्थलों की यात्रा या रिश्तेदारों से मिलने का वीजा लेकर आते है, लेकिन वापस नहीं लौटने की तैयारी के साथ पहुंचते हैं. आजादी के वक्त पाकिस्तान में 20 फीसदी अल्पसंख्यक थे, लेकिन अब ये आंकड़ा महज 1.7 फीसदी रह गया है.


भारत में पाकिस्‍तान और बांग्‍लादेश से पलायन कर आए हिंदुओं को सात साल रहने के बाद भारतीय नागरिक की कानूनी मान्‍यता मिलती है. यह समय-अवधि घटाकर दो साल कर देनी चाहिए. हालांकि पाकिस्‍तान में रह रहे हिंदुओं की सुरक्षा की गारंटी वह भारत सरकार क्‍या लेगी, जो अपने ही देश के कश्‍मीर से बेदखल कर दिए गए पांच लाख हिंदुओं की सुध नहीं ले पा रही है? अपने ही देश के मूल निवासियों को अपने ही देश में शरणार्थी बना दिए जाने का दूसरा उदाहरण पूरी दुनिया में और कहीं नहीं है.


आरुषि ने पांच साल इंतजार किया पर जेसिका कांड….

बलात्कार नहीं बल्कि इच्छा से सम्भोग किया गया था!!

आखिरकार क्या हुआ था 16 दिसंबर की रात ?






Web Title : rape cases in pakistan



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2 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

raksharam pandey के द्वारा
January 31, 2014

भारत की राजनीति के पतन की सच्ची कहानी यही शरणार्थी ही लिखेगें की किस प्रकार सबसे बड़ा लोकतंत्र अपने लोकप्रियता को हजारों सैनिकों और लाखों शरणार्थीयों के परिजनों के रुदन से रोज तिल-तिल करके खो दिया और पुनः गुलामी की ओर अपने कदम बढ़ाता रहा .  

sudhir yadav के द्वारा
January 31, 2014

हमने अपने कर्मो से भारत की छवि को तार तार कर दिया है यहां फैली सामाजिक एवं राजनीतिक अव्यवस्था के कारण अक्सर हमारे देश के खास और आम लोगों का अपमान विदेशो में होता है। हम अपने अपमान का घूंट यह सोचकर पी लेते है कि हम कुछ नहीं कर सकते है ।हम और हमारी सरकार लाचार है जो देश अपने नागरिकों को उनकी समस्याओं से निजात नहीं दिला सकती है वह पाकिस्तान जैसे देशों में अपने भाई और वहनों पर हो रहे अत्याचार से मुक्ति कैसे दिला सकता है। भारत की दुर्दशा देखकर सोचने पर मजबूर हो जाता हॅू वाकई इस धरती पर ईश्वर है या नहीं


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