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आखिरकार क्या हुआ था 16 दिसंबर की रात ?

Posted On: 16 Dec, 2013 social issues में

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समाज को झकझोर देने वाली 16 दिसंबर की भयानक रात को बीते पूरा एक वर्ष हो चुका है. 16 दिसंबर साल 2012 की रात के बाद समाज ने स्त्रियों से वादा किया था कि अब उनके साथ बलात्कार जैसी घटनाएं नहीं होंगी. यहां तक कि तमाम राजनेताओं ने भी यही वादा किया कि अब समाज में ऐसे कानून बनाए जाएंगे जो बलात्कार जैसी घटनाओं को रोकने में सहायक होंगे. आज वही दिन है जिस दिन यह तमाम वादे किए गए पर क्या वह वादे सिर्फ नाम मात्र के थे या इनमें सच्चाई भी थी इस बात का आंकलन करना अभी बाकी है.


delhi rape caseदिल्ली में पिछले साल हुई गैंगरेप की घटना ने सम्पूर्ण समाज को झकझोर कर रख दिया था. कड़ी सर्दी में भी लोग आंदोलन के लिए सड़कों पर उतर आए थे. मुकेश, पवन, विनय और अक्षय ठाकुर इन चार आरोपियों को मौत की सजा सुनाकर अदालत ने दामिनी के साथ न्याय तो किया पर इंसाफ होना अभी भी बाकी है क्योंकि अदालत के इस फैसले के बाद भी समाज में बलात्कार जैसी घटनाओं के लिए खौफ नहीं बना.

15 मई साल 2008


आखिरकार क्या हुआ था 16 दिसंबर की रात

  • 16 दिसंबर साल 2012 की रात एक लड़की के साथ छह लोगों ने चलती बस में गैंगरेप किया और उसका क्रूरतापूर्वक उत्पीड़न करने के बाद उसे चलती बस से फेंक दिया गया. इसके बाद उसके एक दोस्त को घायल अवस्था में सड़क के किनारे फेंक दिया गया था. बलात्कारियों में से एक किशोर था इसलिए उसके खिलाफ सुनवाई ‘जुवेनाइल जस्टिस बोर्ड’ में की गई. सुनवाई के बाद बोर्ड ने किशोर आरोपी को तीन साल के लिए सुधार गृह में भेज दिया.
  • पीड़िता की मौत के पांच दिन बाद पुलिस ने इन पांच आरोपियों के खिलाफ बलात्कार, हत्या, अपहरण और सबूत मिटाने के आरोप लगाते हुए मामला दर्ज कर लिया था. बलात्कारियों में से एक आरोपी राम सिंह 11 मार्च साल 2013 को तिहाड़ जेल में मरा हुआ पाया गया था.
  • चारो आरोपियों अक्षय ठाकुर, विनय शर्मा, पवन गुप्ता और मुकेश पर फास्ट ट्रैक अदालत में मुकदमा चलाया गया. फास्ट ट्रैक अदालत ने उन्हें 13 सितंबर को मौत की सजा सुनाई. इस फैसले की पुष्टि के लिए यह मामला अभी उच्च न्यायालय में है. पीड़िता के माता-पिता द्वारा दायर की गई याचिका पर उच्चतम न्यायालय में 6 जनवरी को सुनवाई होनी है.


क्या जरूरत है नारी निकेतन जैसी संस्थाओं की


no rapeघटना के बाद क्या ?

समाज में रहने वाली महिलाओं की रक्षा की जिम्मेदारी उठाते हुए एक हेल्पलाइन नंबर शुरू किया गया और ऐसा सुनिश्चित किया गया कि जब भी किसी महिला को जरूरत होगी तो इस हेल्पलाइन के जरिए उसकी मदद की जाएगी. महिलाओं के लिए सुनिश्चित की जाने वाली हेल्पलाइन सेवा कितनी सफल हुई और कितनी नहीं इस बात का सरकारी आंकड़ा मौजूद नहीं है. 16 दिसंबर साल 2012 की रात के बाद समाज में जो बड़ा बदलाव आया वो यह था कि बलात्कार से पीड़ित महिलाएं पुलिस थानों में जाकर रिपोर्ट दर्ज कराने लगीं.


16 दिसंबर साल 2012 की रात के बाद भी दिल्ली और सम्पूर्ण भारत में बलात्कार की घटनाएं बढ़ती रहीं. दिल्ली पुलिस के आंकड़े के अनुसार, राष्ट्रीय राजधानी में 30 नवंबर तक बलात्कार के कुल 1,493 मामले दर्ज किए गए जो कि साल 2012 में इसी अवधि में दर्ज मामलों की तुलना में दोगुने से अधिक है. सबसे बड़ी चिंताजनक बात यह है कि महिलाओं के खिलाफ उत्पीड़न के मामलों में पांच गुना बढोत्तरी दर्ज की गई है. राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो के आंकड़ों के अनुसार, साल 2012 में बलात्कार के 706, 2011 में 572 और 2010 में 507 मामले दर्ज किए गए थे. इन आंकड़ों को देखते हुए इस बात का अनुमान लगाना कठिन नहीं है कि 16 दिसंबर साल 2012 की भयानक रात के बाद दिल्ली या फिर सम्पूर्ण भारत की तस्वीर में कुछ खास अंतर आया होगा.


बलात्कार नहीं बल्कि इच्छा से सम्भोग किया गया था!!

यह मर्द बलात्कारी नहीं मानसिक रोगी हैं

दुनिया की भीड़ में सुकून देती यह प्रेम कहानी


delhi rape case



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