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आरुषि ने पांच साल इंतजार किया पर जेसिका कांड....

Posted On: 26 Nov, 2013 social issues में

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15 मई साल 2008 14 वर्षीय आरुषि का शव नोएडा में स्थित उसके घर के एक कमरे में बिस्तर पर पड़ा मिला. उस समय घर में सिर्फ चार लोग मौजूद थे. एक स्वयं आरुषि, आरुषि के माता-पिता राजेश और नूपुर तलवार तथा नौकर हेमराज. ऐसे में पुलिस आरुषि के माता-पिता पर शक कर नहीं सकती थी इसलिए नौकर हेमराज को आरुषि का कातिल समझा जाने लगा. 17 मई साल 2008 को मामले में नया मोड़ तब आया जब पुलिस की छानबीन के दौरान हेमराज का शव घर की छत पर मिला.


‘31 मई साल 2008 को सीबीआई ने आरुषि हत्याकांड के केस को अपने हाथों में लिया. यह केस सीबीआई के हाथों में आने के बाद शुरू से ही कुछ इस तरह चल रहा था जैसे कि सीबीआई पहले ही मान चुकी हो कि आरुषि के माता-पिता राजेश और नूपुर अपनी बेटी की हत्या के लिए दोषी हैं. मीडिया द्वारा आरुषि-हेमराज हत्याकांड को अब तक की सबसे बड़ी मर्डर मिस्ट्री बताया गया. खैर कोर्ट ने भी आरुषि के माता-पिता राजेश और नूपुर तलवार को आरुषि और हेमराज की हत्या के लिए आरोपी बता दिया है जिस कारण आरुषि हत्याकांड को लेकर मीडिया में गर्मागर्मी छाई हुई है पर कुछ और ऐसे ही महिलाओं से जुड़े हत्याकांड हैं जिनमें ग्यारह से बीस साल तक इंतजार करना पड़ा.

पापा ने मेरे साथ…….और रो पड़ी


jessica caseJessica Murder Case: जेसिका लाल हत्याकांड

30 अप्रैल साल 1999 की देर रात एक पार्टी में जेसिका नाम की एक लड़की को गोली लगती है और उसी रात अपोलो अस्पताल के चिकित्सक उसकी मौत की घोषणा करते हैं. इस केस में नया मोड़ तब आता है जब 2 मई के दिन दिल्ली पुलिस को नोएडा से टाटा सफारी कार मिल जाती है. यह कार हरियाणा के कांग्रेस नेता विनोद शर्मा के बेटे मनु शर्मा की होती है. 3 अगस्त के दिन भारतीय दंड संहिता की विभिन्न धाराओं के तहत उन लोगों के खिलाफ आरोप पत्र दाखिल किया जाता है जिस पर पुलिस को शक होता है और इसके बाद एक बहन का अपनी बहन को इंसाफ दिलाने का सफर शुरू होता है.


सबरीना (जेसिका की बहन) जेसिका की मौत के लिए जिम्मेदार नेता के बेटे मनु शर्मा को आरोपी साबित करने के लिए ग्यारह साल की जंग लड़ती है. इस बीच चश्मदीद गवाह श्याम मुंशी और शिव दास अपने बयान से पलट जाते हैं जिस कारण सबरीना के लिए और भी ज्यादा मुश्किल हो जाता है अपनी बहन के कातिलों को सजा दिला पाना. जेसिका की मौत हुए लगभग दस साल बीत जाते हैं उसके बाद तारीख 19 अप्रैल साल 2010 को उच्चतम न्यायालय मनु शर्मा को अपराधी ठहराते हुए उसकी उम्र कैद की सजा बरकरार रखता है.

शरीर तो बेचा था पर वेश्या बनने के लिए नहीं


bhanwari deviBhanwari Devi Case: भंवरी देवी कांड

भंवरी देवी कांड ने भारतीय राजनेताओं की ऐसी तस्वीर खींची जिसके बाद शायद ही कोई नेताओं पर यकीन करेगा. पूर्व कैबिनेट मंत्री महिपाल मदेरणा की अश्‍लील सीडी ने पूरे देश की राजनीति को झकझोर कर रख दिया था. सालों पहले जब नर्स भंवरी देवी लापता हुई तो ढाई महीने बीत जाने के बाद भी पुलिस के हाथों कोई सुराग नहीं लगा. पुलिस के बाद सीबीआई भी कई महीनों तक अंधेरे में ही हाथ-पांव मारती रही और अंत में सीबीआई को जालोड़ा में भंवरी देवी की लाश के दुकड़े मिले. भंवरी देवी कांड के जरिए समाज की वो सच्चाई सामने आई जब एक महिला अपने सपनों को पूरा करने की लालसा में किसी नेता का शिकार हो जाती है और वो नेता अपने गुनाह को छिपाने के लिए अमानवीयता की सारी हदें पार कर जाता है.


Geetika Suicide Case: गीतिका केस

एमडीएलआर एयरलाइंस की पूर्व एयरहोस्टेस  गीतिका ने खुदकुशी की थी और उसके ऐसा करने के पीछे का कारण मानसिक रूप से परेशान रहना था. हरियाणा के मंत्री और एमडीएलआर कंपनी के मालिक गोपाल कांडा, गीतिका को मानसिक और शारीरिक रूप से ठेस पहुंचाने के लिए जिम्मेदार थे. इसके बाद इस केस ने नया मोड़ तब लिया जब गीतिका की मां अनुराधा शर्मा ने भी तनाव के चलते आत्महत्या कर ली.

यह मर्द बलात्कारी नहीं मानसिक रोगी हैं

जब प्यार ही नहीं हुआ तो फिर शादी कैसी ?

‘मैं ही दोषी क्यों’ ?


aarushi murder case




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