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यह मर्द बलात्कारी नहीं मानसिक रोगी हैं

Posted On: 8 Oct, 2013 social issues में

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‘वास्तविक कहानियां ज्यादा गहरी चोट करती हैं’

मैं अपनी बहन के साथ कुंभ स्नान करने गई थी. इसी दौरान राकेश नाम के एक आदमी ने हथियार के बल पर मुझे अगवा कर लिया. इसके बाद मुझे उत्तर प्रदेश के रेणुकूट में एक कमरे में बंद कर रखा गया. जहां मेरे साथ लगातार दुष्कर्म किया गया और साथ ही हथियार व चाकू दिखा किसी को कुछ भी बताने से मना कर दिया.


इतना ही नहीं 5 अक्टूबर के दिन राकेश का फुफेरा भाई दीपू सिंह कमरे में आया और उन दोनों ने जबरन मुझे अच्छी साड़ी पहनाई तथा हाथ में मेहंदी भी लगाई. इसके बाद मुझे ट्रेन से मोहम्मदगंज ले जाया गया. जहां उन दोनों भाइयों ने मेरी हत्या करने का विचार बना लिया था. हत्या करने में असफल होने पर मुझे वहीं घायल अवस्था में छोड़कर चले गए.


crying ladyयह बयान पीड़िता ने तब दिया जब वो कुछ भी बोलने के हालात में नहीं है. यह कोई कहानी नहीं है जिसे हमने आपको सुनाया और आपने सुन ली. दरअसल यह सचाई है उस समाज की जहां पुरुष के नाम पर कुछ मर्द आवारा खुले जानवर की भांति समाज में रहते हैं. कुछ ऐसी ही सच्ची घटनाएं हैं बलात्कार की जहां एक मर्द बलात्कारी ही नहीं बल्कि एक मानसिक रोगी नजर आता है.

प्रेमिका बदलने वाला युवक मत कहिए !!


मानसिक रोगी होने का इससे बेहतर उदाहरण कहां

दामिनी कहो या निर्भया पर 16 दिसंबर की रात होने वाली बलात्कार की घटना सबको याद होगी. 23 वर्षीय दामिनी के साथ बस में पांच लड़कों ने बारी-बारी से बलात्कार किया और बस को दिल्ली एन सी आर की पॉश कॉलोनियों में घुमाते रहे. बेहद दर्दनाक तरीके से बलात्कार करने के बाद उनमें से एक दरिंदे ने लोहे की रॉड दामिनी के गुप्त अंग में घोंप दी जो पूरी योनि मार्ग को चीरती हुई पेट तक जा घुसी और खून का गुब्बार फूट पड़ा. इतना ही नहीं अधमरी लहूलुहान हालत में इन नर पिशाचों ने दामिनी को चलती बस से बाहर फेंक दिया था. अब क्या आप इन बलात्कारी मर्दों को मानसिक रोगी नहीं कहेंगे.

प्यार हो या फिर दोस्ती बस ‘देव’ सुनना पसंद था


पांच साल की बच्ची के साथ यौन शोषण

मासूम बच्ची जिसकी उम्र पांच साल की थी उसे पता नहीं था कि उसके साथ क्या हो रहा है पर इसमें उसकी कोई गलती नहीं थी बल्कि गलती उस हैवान की थी जो यह सब कुछ कर रहा था. वो हैवान कोई और नहीं बल्कि उसका नाना था. पांच साल की बच्ची नगमा(बदला हुआ नाम) के साथ उसका नाना शारीरिक संबंध बनाता था. ‘नानाजी मुझे नीचे (प्राइवेट पार्ट में) टच करते हैं’ मासूम सी बच्ची के मुंह से यह सुनने के बाद पुरुषवादी समाज के उन मर्दों की याद आ गई जो ऐसा कर अपनी घृणित मानसिकता का उदाहरण देते हैं.


पांच साल की बच्ची को कमरे में बंद कर छोड़ गए

दिल्ली के गांधी नगर इलाके में दो युवक एक पांच साल की बच्ची से बलात्कार कर दो दिनों तक उसे कमरे में बंद कर छोड़ गए थे. दोनों युवकों ने बलात्कार करने से पहले शराब पी थी और पोर्न फिल्में देखी थी. दोनों बलात्कारी पांच साल की बच्ची को बलात्कार करने के बाद मार डालना चाहते थे पर जब कामयाब ना हो सके तो उस पांच साल की बच्ची को कमरे में बंद कर दिया जिससे कि वो दम घुटने से मर जाए. क्या अब भी आप बलात्कार करने वाले व्यक्ति को केवल बलात्कारी कहेंगे? क्या वह बलात्कारी होने के साथ-साथ घृणित मानसिकता रखने वाले मर्द हैं और समाज में खुले रूप में घूम रहे मानसिक रोगी हैं?

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Web Title: rape victims real life stories



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