blogid : 12846 postid : 577784

अल्लाह मेरे, दुआ मेरी कुछ काम न आई..

Posted On: 12 Aug, 2013 Others में

  • SocialTwist Tell-a-Friend

downloadगुनाह किसी भी तरह का हो, गुनाह ही होता है. पर कुछ गुनाह ऐसे होते हैं जिसके लिए कोई भी सजा छोटी पड़ जाती है. कानूनी कार्रवाइयों के बाद हमारा समाज कहता है कि गुनहगार को उसके गुनाहों की सजा मिल गई जबकि हकीकत कुछ और ही होता है.


अभी पिछले दिनों (18 जुलाई) लड़कियों-औरतों पर तेजाब फेंकने के मामले में सुप्रीम कोर्ट का ऑर्डर आया. सुप्रीम कोर्ट ने इसे जहर कानून के अंतर्गत कर दिया. अब तेजाब फेंकने के लिए गुनहगार को न्यूनतम 3 वर्ष की सजा और 50 हजार रुपए का जुर्माना होगा. तेजाब की खरीद-बिक्री भी जहर कानून, 1919 के अंतर्गत होगी. तेजाब की कितनी मात्रा किसे बेची गई, इसकी जानकारी भी दुकानदारों को रखनी होगी, तो दुकानदार यह नहीं कह सकते कि बेचना उनका काम है और किसे, क्या बेचा यह उन्हें याद नहीं या इसकी कोई जानकारी नहीं है. इसके अलावे तेजाब खरीदने के लिए भी अब पहचान पत्र दिखाना होगा. किस काम के लिए इसकी खरीद की जा रही है, खरीदार को यह भी बताना होगा.

Read: कानून यहां बस एक खिलौना बनकर रह जाता है


तेजाब की इन घटनाओं पर कोर्ट का फैसला बहुत अहम माना जा रहा था. माना जा रहा था कि इतनी बंदिशों के बाद अब शायद तेजाब फेंकने की घटनाओं में कमी आएगी. पर कोर्ट के इस फैसले के 10 दिन भी पूरे नहीं हुए कि एक और घटना सामने आ गई. आज भी अक्सर अखबारों में ऐसी खबरें देखने को मिल ही जाती हैं. यह पहले से कहीं ज्यादा डराने वाली, कानून और समाज दोनों के लिए खतरे का सूचक है. समूचे समाज को गुनाहमुक्त करना तो संभव नहीं, पर किसी भी गुनाह के लिए कानून बनाए इसलिए गए हैं ताकि इसमें कमी लाई जाए.


कानून कभी भी गुनाह खत्म करने की गारंटी नहीं होती लेकिन कानून उन गुनाहों को कम करने का एक महत्वपूर्ण रास्ता, एक प्रकार का संबल होता है. लेकिन इस प्रकार की घटनाएं कानून का माखौल उड़ाती हैं, इससे इनकार नहीं किया जा सकता. ऐसा होता क्यों है? सबसे ज्यादा औरतों और लड़कियों की सुरक्षा की बात करने वाला समाज, इनकी सुरक्षा के लिए चिंतित रहने वाला समाज आखिर इतने निर्भीक रूप से कानून का माखौल उड़ाते हुए क्यों अपनी बर्बरता छोड़ नहीं पाता?

Read: नजर बदली, तभी वह आगे बढ़ी


एक सच्चाई यह भी है कि लड़कियों को अपना अधिकार क्षेत्र मानने वाला पुरुषों का रवैया भी इसके लिए बहुत हद तक जिम्मेदार है. प्रेम प्रस्ताव तो छोड़िए, किसी महिला ने किसी पुरुष को किसी भी बात के लिए न कहा, इसका मतलब उस पुरुष की इज्जत कम हो गई…ऐसी ही सोच कुछ हमारे मजाक, हमारी आम बोल-चाल में भी झलकती है. ऐसा भी नहीं है कि यह सोच किसी एक तबके, किसी एक क्षेत्र विशेष की समस्या है, बल्कि हर वर्ग, हर क्षेत्र की समस्या है.


भारत विशेष रूप से पुरुष-प्रधान समाज के लिए से जाना जरूर जाता है, लेकिन यह समस्या विश्व के लगभग हर कोने में किसी-न-किसी रूप में देखने को मिल ही जाती है. भारत की समस्या यह है कि यहां औरतें, लड़कियां, पिता-पति और भाइयों की खानदानी जागीर मानी जाती हैं, खानदान की लाज की धारक मानी जाती है. बेटी और पत्नी घर की इज्जत होती है, इसलिए अपनी इस इज्जत को वे छुपाकर रखते हैं, कि कहीं किसी की नजर न लग जाए. यहां तक भी बहुत बुरा नहीं होता, लेकिन बुरा तब होता है जब अपनी इज्जत के अलावे वही पिता और भाई दूसरों के घर की इज्जत की तरफ नजर उठाते हैं. वह इज्जत भी इन्हें अपनी इज्जत करती हुई मिलनी चाहिए. अपनी बहन और बेटियां जब दूसरों के बेटों और पतियों के साथ बात करें तब तो इनकी इज्जत जाती ही है, हद तो तब होती है जब दूसरों की ऐसी ही बेटियां और पत्नियां अपने पिता और पति की इज्जत की खातिर या अपनी खुद की खुशी की खातिर जब (भारतीय विचारधारा के अनुसार) इन पराए पुरुषों की बात मानने से इनकार करती हैं, तो भी इनकी इज्जत पर पड़ जाती है. इस तरह यह इज्जत लड़कियों के पांवों की बेड़ियां बन जाती हैं.

ऐसी ही सोच तेजाब फेंकने जैसी वारदातें जन्म दिया करती हैं. पर वारदातें उनके लिए होती हैं, जिनके लिए यह मात्र एक हिंसक खबर है. हकीकत तो यह है कि वारदात ऐसे हमलों को बस मीडिया का दिया हुआ एक रचनात्मक नाम है, उन भुक्तभोगियों से पूछिए क्या होती हैं ये वारदातें उनके लिए, जब जिंदगी भर भगवान की दी हुई एक खूबसूरत जिंदगी को काले अंधेरे में जीने को वे मजबूर हो जाती हैं! अल्लाह मेरे, दुआ मेरी कुछ काम न आई; इतने चराग जलाए पर रौशनी कहीं नजर न आई….. ऐसी घुटन भरी और बेबस जिंदगी ये उम्र भर जीने को मजबूर होती हैं. तो हम कैसे कह सकते हैं कि गुनहगार को उसकी सजा मिल गई?

Read:

पूरे गांव को रोशन कर बदल दी महिलाओं की किस्मत



Tags:                         

Rate this Article:

1 Star2 Stars3 Stars4 Stars5 Stars (1 votes, average: 5.00 out of 5)
Loading ... Loading ...

0 प्रतिक्रिया

  • SocialTwist Tell-a-Friend

Post a Comment

CAPTCHA Image
*

Reset

नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments


topic of the week



अन्य ब्लॉग

latest from jagran