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आगे बढ़ रही है नारी

Posted On: 19 Feb, 2013 में

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भारतीय पुरुष प्रधान समाज में स्त्रियों को एक सामान की तरह देखा जाता है. कई लोग तो महिलाओं को सिर्फ उपभोग की वस्तु मानते हैं. आज भी समाज में कई ऐसे लोग हैं जो शादी सिर्फ इसीलिए करते हैं ताकि उनके घर में एक काम करने वाली बहू आए. लेकिन जमाना बदल रहा है समाज बदल रहा है. समाज के साथ महिलाओं का व्यवहार और जीने का तरीका भी बदल रहा है.

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कल तक जो महिलाएं घर में बैठे चूल्हे-चौके में व्यस्त रहती थीं आज वह बाहर निकल कर ऑफिसों में उच्च पदों पर भी काम कर रही हैं. घर की मशीनें आज बाहर निकल कर भी अपना वर्चस्व दिखा रही हैं. सिर्फ खेल और फिल्म जगत ही नहीं आज तो औरतें पाक कला और सामाजिक जगत में भी अपना वर्चस्व कायम कर रही हैं. ऐसे देखा जाए तो खाना बनाना शुरू से औरतों का ही काम है पर पहले वो घर तक ही सीमित रहती थीं जबकि आज वह सारी दुनिया में अपने खाने की खुशबू फैला रही हैं. दूसरी तरफ पहले जो नारी अपने अधिकारों के लिए लड़ती थी आज वह दूसरे के अधिकारों के लिए आवाज उठा रही है.


आज हम आपको ऐसी ही कुछ महिलाओं के बारे में बताएंगे जिन्होंने अपनी काबीलियत के बल पर यह साबित किया है कि महिलाएं किसी से कम नहीं हैं.

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जानी-मानी पाक कला विशेषज्ञ पिंकी लिलानी


अधिकतर महिलाओं का सबसे पसंदीदा काम खाना बनाना होता है. लेकिन वह अपने इस कला को घर तक ही सीमित रखती हैं. परंतु हाल के सालों में तरला दलाल और पिंकी लिलानी जैसी महिलाओं ने पाक कला जगत में अपना नाम रोशन किया है.


पिंकी लिलानी का जन्म 1954 में कोलकाता में हुआ और मुंबई के सोफिया कॉलेज और कोलकाता के लॉरेटो कॉलेज से इन्होंने अपनी पढ़ाई पूरी की है. अपने पति के साथ शादी कर वह ब्रिटेन में जाकर बस गईं. यहां उनके पति ने उनकी पाक कला की तारीफ की और दुनिया के सामने इसे प्रदर्शित करने का जज्बा दिया. फिर क्या था पति का साथ और हौसले के बल पर वह उस मकाम पर पहुंच गईं जिसके बारे में उन्होंने कभी सोचा भी नहीं था.


आज वह न केवल भारतीय बल्कि ब्रिटिश सुपरमार्केट में भोजन निर्माताओं के लिए एक सलाहकार के रूप में भी काम कर रही हैं. उनकी पाक कला की किताब भी प्रकाशित हुई है जिसका नाम है स्पाइस जादू. वह स्पाइस मैजिक कंपनी की मालकिन भी हैं. पिंकी लिलानी को ब्रिटेन में कई अवार्ड भी मिले हैं जिनमें एशियन वीमेन ऑफ एचीवमेंट अवार्ड, वूमेन ऑफ फ्यूचर अवार्ड और ग्लोबल फ्यूचर अवार्ड शामिल हैं.

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अधिकारों के लिए आवाज़ उठाती शमी चक्रबर्ती



शमी चक्रबर्ती का जन्म 16 जून, 1969 को हैरो में हिंदू बंगाली परिवार में हुआ था और पढ़ाई लंदन स्कूल ऑफ इकॉनॉमिक्स से हुई. उन्हें नागरिक अधिकारों की हिमायत करने वाले के तौर पर जाना जाता है. कानून की पढ़ाई करने के बाद वह 1985-87 में सोशल डेमोक्रेटिक पार्टी की एक सक्रिय सदस्य थीं. जब उन्होंने पार्टी छोड़ी उसके बाद उन्होंने गृह मंत्रालय में नौकरी की शुरुआत की, जिसके बाद वह गृह मंत्रालय की ही नागरिक अधिकारों की वकील बन गईं. फिलहाल वह  अंतरराष्ट्रीय संबधों पर काम करने वाले डिचले फाउंडेशन की गवर्नर हैं और 2003 से नेशनल काउंसिल फॉर सिविल लिबर्टीज की निदेशक हैं. इनके पति का नाम मार्टिन है. इन्हें एक बेटा भी है.  2007 के क्वींस बर्थडे ऑनर्स में ब्रिटिश साम्राज्य के आदेश पर उन्हें कमांडर भी नियुक्त किया गया था. इसके बाद उन्हें 21 जुलाई, 2010 को एक स्नातक समारोह में साउथेम्प्टन विश्वविद्यालय से डॉक्टरेट की मानद उपाधि प्रादान की गई .


हाल ही में उन्हें बीबीसी रेडियो 4 के कार्यक्रम वूमेन ऑवर ने वर्ष 2013 के लिए ब्रिटेन की 100 सबसे ताकतवर महिलाओं की सूची में शामिल किया है.


आज हमारे समाज की महिलाओं को इसी दृढ़ इच्छाशक्ति की जरूरत है तभी वह भी पिंकी लिलानी और शमी चक्रबर्ती की तरह अपने सपने को पूरा कर पाएंगी और इस पुरुषवादी समाज की सोच को करारा जवाब दे पाएंगी ताकि वह भी समझ सके कि नारी किसी से कम नहीं होती है.

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जमाना बदल रहा है

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3 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

rushabhshukla के द्वारा
May 20, 2013

आज मै एक ऐसी रचना लेकर आप सब के सामने उपस्थित हुआ हूँ, जिसे पढ़कर आप सब की आँखे नाम हो जायेगी. और यही हमारे देश की कड़वी सच्चाई भी है, इस कविता के माध्यम से मै ऋषभ शुक्ला, इस समाज का निर्दयी ही सही लेकिन है तो सच. आज हमारे समाज के लोग महिलाओ के प्रती वही पुरानी सोच रखते है जो वह हमेशा रखते आये है, और आगे भी ऐसी ही सोच रखने का इरादा है. गरीब माँ-बाप अपनी बेटियों को बोझ समझते है और वह संतान के रूप में एक बेटा चाहते है, और इसके लिए वह गर्भ में ही जाच के द्वारा उन्हें यदी पता चल गया की गर्भ में बच्ची है तो उसे इस दुनिया में आने से पहले ही मार देते है, उस नन्ही सी जान को जो इस निर्मम दुनिया में आने को बेताब रहती है, उसकी सभी इच्छाओ को भी मार देते है . मै इस कविता के माध्यम से उस छोटी गुडिया के दर्द को आप सब से मुखातिब करने का प्रयत्न कर रहा हूँ. कृपया मेरी गुजारिश है की आप सब इस लिंक को देखे और उसके बारे में कम से कम दो शब्द कहे. यदी कमेंट देने में कोई असुविधा हो तो उसे लाइक करे या वोट करे. http://rushabhshukla.jagranjunction.com/?p=25 शुक्रिया

अमन के द्वारा
February 20, 2013

ये तो बहुत अच्छी बात है .

पूजा के द्वारा
February 20, 2013

बहुत जरूरी है नारीयों का आगे बढ़ना .


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