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आखिरी बोल : "मां दोषियों को फांसी"

Posted On: 5 Jan, 2013 में

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gang-rapeमां दोषियों को फांसी जरूर होनी चाहिए……ये उसके आखिरी बोल थे जिसे उसकी मां के कानों ने सुना था. अब उसकी मां कभी भी अपनी बेटी की आवाज नहीं सुन पाएगी. किसी मां के लिए अपने बच्चे को मरते देखने के दर्द का अंदाजा इस दुनिया में कोई भी नहीं लगा सकता है. शायद खुद भगवान भी नहीं. अगर आज भगवान भी इस दुनिया को देखते होंगे तो सोचते होंगे कि मैं क्या बनाना चाहता था और ये दुनिया क्या बन गई.


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दुनिया वालों के लिए उसकी मौत 28 दिसंबर, 2012 को हुई लेकिन सही मायने में उसकी मौत तो उसी दिन हो गई थी जिस दिन उन दरिंदों ने उसे अपनी हवस का शिकार बनाया था. वो रोती रही चिल्लाती रही मिन्नतें मांगती रही पर उन हैवानों को कुछ भी सुनाई नहीं दे रहा था. उन लोगों ने जिस हैवानियत से उसके शरीर के साथ खेला कोई भी ऐसा करने से पहले दस बार सोचेगा. यहां तक कि उसके साथी को भी इतनी बुरी तरह से मारा कि उसे देख कर किसी की भी आत्मा कांप जाए और फिर उन दोनों को नग्न अवस्था में सड़क किनारे फेंक दिया और चलते बने. बाद में लोगों को पता चला तो लोगों ने उसे अस्पताल पहुंचाया. एक तरफ तो किसी ने उन्हें अस्पताल ले जा कर मानवता की मिसाल दी तो किसी ने उनके साथ बर्बरता कर  मानवता को तार-तार कर दिया.


आज समाज में बस लड़की को ही गलत समझा जाता है चाहे वो गलत हो या न हो. इस घटना के बाद भी कई लोग लड़की को गलत ठहरा रहे हैं. उनका कहना है कि इतनी रात को लड़की बाहर लड़के के साथ क्यों घूम रही थी ? जैसे समाज ने लड़की के रात में घूमने पर यही सजा देने की सोची है या फिर ये कहें कि पुरुष समाज ने औरतों के लिए यही सजा मुकर्रर की है. ऐसा क्यों कि जब कोई लड़का रात में बाहर घूमता है तो कोई बात नहीं होती लेकिन जब लड़की घूमे तो सब कुछ गलत?

आज महिलाओं को लेकर हमारे समाज में जो मानसिकता बनी हुई है वो इतनी ज्यादी बुरी है कि इसके बारे में कुछ भी कहना मुश्किल है. पहले तो बलात्कार, छेड़छाड़ की घटना कभी-कभी सुनने को मिलती थी पर आज के समय में तो इसको छोड़ कर और कुछ सुनने को मिलता ही नहीं है.


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कुछ दिन पहले की ही बात है जब मध्य प्रदेश के सागर जिले के सरकारी अस्पताल में एक महिला के साथ अस्पतालकर्मियों ने  ही सामूहिक बलात्कार किया. इस घटना के कारण उसकी बच्ची को इलाज नहीं मिल पाया और उसने दम तोड़ दिया. इसके बाद भी समाज का रवैया यह है कि उसके गांव वाले उसे गांव में नहीं रहने दे रहे हैं. सरकार भी चुप है  पुलिस को शिकायत का इंतजार है  जो वह गांव के दबंगों के डर के मारे कर नहीं पा रही है. ये सब सिर्फ इसलिए कि वो एक गरीब महिला है, नहीं ये सब सिर्फ इसलिए कि वो एक नारी है.


अभी के वर्तमान समय में नारी होना ही बहुत बड़ा पाप है. आज का पुरुष समाज अपनी हरकतों की वजह से उन लोगों को और बढ़ावा दे रहा  है जो भ्रूण हत्या के पक्ष में हैं.  क्योंकि उन लोगों का मानना है कि जब लड़कियों के साथ इतना बुरा हो रहा है तो क्या जरूरत है लड़कियों को दुनिया में लाने का. न वो आएंगी और न उनको इन सब चीजों का सामना करना पड़ेगा. . आज इसी पुरुषवादी मानसिकता के कारण नारियों का अस्तित्व ही खतरे में पड़ गया है.



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Tag: rape, rape in delhi , women , safety , बलात्कार , रेप , दिल्ली में रेप , नारी , महिला ,



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