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यहां लड़कियां खुद बेचने को तैयार हैं

Posted On: 18 Nov, 2012 में

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women empowermentलड़कियां अपने कौमार्य को सबसे ज्यादा कीमती समझती हैं पर सोचिए जरा ऐसा भी हो कि लड़कियां खुद ही अपना कौमार्य बेचने को तैयार हो जाएं. पर यह गंभीर सवाल है कि ऐसा क्या होता है जब लड़कियां अपना कौमार्य बेचने को तैयार हो जाती हैं. एक समय था जब लडकियां अपना कौमार्य बचाने के लिए सब कुछ करती थीं, अपने कौमार्य को एक अमूल्य धन की तरह रखती थीं. लेकिन अब समय बदल गया है. आज न सिर्फ कौमार्य बिकता है बल्कि कई लड़कियां खुद इसकी बोली भी लगाती हैं. कलयुग के इस दौर में वासना इस कदर फूट-फूट कर भरी हुई है कि वेश्यावृत्ति के दलालों को अब लड़कियों का कौमार्य भी पैसा कमाने का एक तरीका नजर आता है. हाल ही में ब्रिटेन में एक समाचार के अनुसार एक ऐसे गैंग का भंडाफोड़ हुआ है जो नाबालिग और कुंवारी लड़कियों को वेश्याओं की तरह इस्तेमाल करते थे. यह लोग इंटरनेट के सहारे एक वेबसाइट पर इन लडकियों को इस दलदल में डालते थे. इस सारे प्रकरण में तीन महिलाओं समेत एक युवक को एक होटल से पकड़ा गया. देखने वाली बात यह थी कि जिन लड़कियों को वेश्याओं के तौर पर बेचा जा रहा था उसका बकायदा प्रचार भी किया गया कि इनका कौमार्य लूटिए और मजे उड़ाइए यानी कौमार्य को निशाना बना अधिक पैसा कमाने की चाहत थी इन लोगों की और सहारा लिया गया इंटरनेट का.


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इंटरनेट से जरा बचके

आज कल इंटरनेट से अधिक सुगम और व्यापक आपसी आदान-प्रदान का कोई माध्यम नहीं रह गया है. हर जगह इसकी आसान पहुंच ने इसे हवा से भी ज्यादा तेज तरीके से हमारे समाज में जमा दिया है. आज इंटरनेट पर ऐसी कई पोर्न और अश्लील वेबसाइट हैं जिनके द्वारा न सिर्फ पोर्न और नग्नता को परोसा जाता है बल्कि देह व्यापारियों के लिए ऐसी वेबसाइट विज्ञापन करने का एक जरिया होता है.


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लड़कियों की तस्वीर और उनकी जानकारी डाल उन्हें नीलाम किया जाता है और कई साइटें तो बाकायदा नीलामी भी लगवाती हैं. ऐसी वेबसाइटों को बंद करना या इनके मालिकों का पता लगाना बहुत मुश्किल होता है क्योंकि अगर आप एक वेबसाइट बंद कर देते हैं तो दो और वेबसाइट शुरु हो जाती है. कई वेबसाइटों को विदेशों की लड़कियां खुद ही चलाती है उस पर अपने कौमार्य की बोली लगवाती हैं.

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इंटरनेट ने हमें बहुत कुछ दिया है. सुगमता, समय की बचत और ढ़ेरों जानकारी एक साथ एक ही समय इंटरनेट पर ही मिलती है. लेकिन भोग और वासना के इन भूखों के लिए इंटरनेट किसी खजाने से कम नहीं है जहां बेपनाह पोर्न और अश्लीलता भरी हुई है. आज भारत में भी ऐसी हजारों साइटे खुलती जा रही हैं क्योंकि पैसों की चाहत और देह व्यापार को चलाने का एक बेहतर उपाय जो ठहरा इंटरनेट. इंटरनेट की ग्लोबल पहुंच से अब छोटे-छोटे देह व्यापारी और वेश्याएं भी हाई प्रोफाइल बनती जा रही हैं.


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‘कौमार्य की भी कीमत लगाई जाती है’

अधिकतर पश्चिमी सभ्यता और समाज के बारे में कहा जाता है कि वहां खुलेपन को स्वीकारा जाता है और कौमार्य आदि को इतनी महत्ता नहीं दी जाती. वहां शादी से पहले सेक्स को भी गलत नहीं मानते, यानी कि पूरे खुले विचार से जीवन अपने नियमों पर जीने की आजादी है लेकिन क्या सभ्यता और नैतिकता को खुलेपन से अलग किया जा सकता है. चाहे पश्चिम हो या पूर्व हर जगह समाज है. समाज में कुछ अच्छे तो कुछ बुरे लोग रहते हैं.


वेश्यावृत्ति का यह फंडा

जो लोग कौमार्य की बोली लगाते हैं या जो लड़किया ऐसा करवाती हैं वह कहीं न कहीं समाज के सामने एक गलत उदाहरण पेश करती हैं. ऐसे मामले भी देखने में बहुत आते हैं जब लड़कियां अपने परिवार के लिए या किसी मजबूरी में पैसा कमाने के लिए अपना विज्ञापन वेबसाइटों पर डालती हैं और ऐसा करने वाली कोई अनजान लड़की नहीं बल्कि पूरी जानकार होती हैं. पैसा और पेट पहले भी मजबूरी और शोषण का रास्ता थे लेकिन इंटरनेट ने इस रास्ते में एक फ्लाईओवर की तरह काम किया है.


ज्यादा मुनाफा और लोकप्रियता को हासिल करने के लिए कौमार्य को निशाना बनाया जा चुका है, अब बस इंतजार है तो इस शोषण के पूर्वी देशों में पहुंचने का. छोटी-छोटी लड़कियों को जबरन देह-व्यापार में घसीट कर उनसे यह पाप करवाना हैवानियत की हद दर्शाता है.

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बस धोखा ही धोखा

कहते हैं धोखे के खेल में धोखा ही मिलता है. इंटरनेट पर जिन लड़कियों के कौमार्य को विज्ञापन बना दिखाया जाता है वास्तव में अक्सर ऐसा कौमार्य नकली होता है. जी हां, कौमार्यता भी आप एक सर्जरी से दुबारा प्राप्त कर सकते हैं. असल में कौमार्यता की निशानी एक झिल्ली को सजर्री से द्वारा पुन: प्राप्त किया जा सकता है. टीन-एज सेक्स, रेप या खेल-कूद से चोट लगने पर कई बार भूलवश जब यह झिल्ली(हाइमन) फट जाती है तो इसे पुन: प्राप्त किया जा सके इसके लिए इस सर्जरी का निर्माण हुआ लेकिन अब यह देह-व्यापारियों की चांदी कर रहा है. यह सर्जरी अधिकतर चीन और जापान में होती है और वह भी बेहद सस्ती. सर्जरी से बार-बार कौमार्यता को हासिल कर यह देह-व्यापारी अधिक पैसा कमाते जा रहे हैं.

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‘पाप की कीमत चुकानी पड़ती है’

भारत जहां लड़कियां शादी से पहले अपने कौमार्य को बेहद संभाल कर रखती थीं, अब पश्चिमी कल्चर की वजह से उन्हें भी यौवनावस्था (टीनएज) में सेक्स की आदत लगती जा रही है. अब हमारे अपने भारत में कई लड़कियां शादी से पहले सेक्स को बुरा नहीं मानतीं बल्कि इसे खुल कर स्वीकारने लगी हैं. लेकिन फिर भी हम अभी अपनी संस्कृति के साथ चल रहे हैं. आज भी भारत में लड़कियां मयार्दा को लांघने से पहले कई बार सोचती हैं.


लेकिन देह-व्यापारियों की गंदी निगाहें हमारे भारत पर पड़ चुकी हैं और अब वह हमारे यहां से नाबालिग लड़कियों को जबरन अगवा कर उन्हें विदेशों में ले जा रहे हैं. मानव-तस्करी में लापता अधिकतर लड़कियों को देह-व्यापार में ही लगाया जाता है. यह गंदा फैल बेशक बाहर रहा हो लेकिन डर का माहैल अंदर तक आ चुका है.

वेश्यावृत्ति और मानव- तस्करी के खिलाफ सरकार समेत अंतराष्ट्रीय संगठनों को भी गंभीरता से सोचना चाहिए ताकि मानव जीवन जानवर बनने से रुक सके. एक बेहतर कल के लिए आज ही छोटे से छोटा कदम प्रभावशाली हो सकता है.


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1 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

aman kumar के द्वारा
November 21, 2012

आपको पहेली बार पड़ा है ! बहुत दमदार है ! बधाई हो ! बहुत अच्छे !


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