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बस शारीरिक संबंध बनाने में ही रुचि

Posted On: 10 Nov, 2012 Others में

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आमतौर पर यह माना जाता है कि महिलाओं की अपेक्षा पुरुष शारीरिक संबंधों के प्रति अधिक आकर्षित रहते हैं. महिलाएं उनके लिए इच्छापूर्ति का एक साधन मात्र हैं. प्रेम संबंधों में भी पुरुष अपनी जरूरत के हिसाब से महिलाओं की भावनाओं को आंकते हैं. महिलाएं जिन्हें हम भावुक ज्यादा मानते हैं, वह जल्दी ही उनके बहकावे में आ जाती हैं और विवाह के पहले ही स्वयं को अपने प्रेमी के प्रति समर्पित कर देती हैं. भोग और विलास से परिपूर्ण पुरुष अगर अपनी प्रेमिका को शारीरिक संबंध बनाने के लिए राजी नहीं कर पाता तो इसके लिए वह अपने संबंध से बाहर का रुख करता है. आम बोलचाल में इसे पेड-सेक्स कहते हैं. महिलाओं को भोग की वस्तु समझने वाले पुरुष शारीरिक संबंधों के प्रति इतना आसक्त हो जाते हैं कि वे इसके लिए भारी-भरकम कीमत चुकाने को भी तैयार रहते हैं. ऐसे पुरुष के लिए यह कतई मायने नहीं रखता कि किसी की प्रेम भावनाएं उससे जुड़ी हुई हैं.

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लेकिन जैसे-जैसे समय बदल रहा है, व्यक्ति का चरित्र, उसका स्वभाव भी महत्वपूर्ण ढंग के परिवर्तित हो रहा है. पहले जहां विवाह से पूर्व पुरुष के साथ संबंध स्थापित करना तक निंदनीय और पूर्णत: निषेध माना जाता था. वही आधुनिक होते समाज में यह एक आम बात बन गई है. पुरुष तो स्वभाव से ही भोग और विलास भरे जीवन में विश्वास रखते थे. उनके लिए शारीरिक संबंध बनाने के लिए विवाह तक का इंतजार करना जरूरी नहीं था. वैवाहिक संबंध के बाहर उन्हें शारीरिक संबंध बनाने के लिए चाहे कितना ही खर्च क्यों ना करना पड़े, अपनी इच्छा पूरी करने के लिए वे इसकी ज्यादा फिक्र नहीं करते थे. लेकिन अब महिलाएं भी विवाह पूर्व संबंध स्थापित करने में कोई बुराई नहीं समझतीं. यह सब इस बात पर निर्भर करता है कि उनका प्रेमी उन्हें किस तरह राजी करता है.

एक नए अध्ययन के अनुसार लगभग 25 प्रतिशत महिलाएं प्रेम-संबंध की शुरूआती चरण में ही शारीरिक संबंध स्थापित कर लेती हैं. उनका यह कदम दूसरी महिलाओं पर दबाव डालता है. महिलाएं नहीं चाहतीं कि उनका प्रेमी उन्हें छोड़कर किसी अन्य महिला के पास चला जाए इसीलिए वह उसके साथ शारीरिक संबंध बना लेती हैं. निश्चित तौर पर महिलाओं का यह व्यवहार पुरुषों की अपेक्षाओं को नकारात्मक स्वरूप में विस्तृत कर रहा है.

कई समाज मनोवैज्ञानिकों का कहना है कि महिलाएं अपने संबंध के स्थायित्व को लेकर आश्वस्त हुए बिना ही संबंध बना लेती हैं. उन्हें ना तो प्रतिबद्धता से कोई लेना-देना होता है और ना ही संबंध की निश्चितता से.

इस अमरीकी शोध पर अपनी राय व्यक्त करते हुए यूनिवर्सिटी ऑफ मिनीसोटा से जुड़ी केथलीन वोह्स ने कहा कि शारीरिक संबंध बस इस बात पर निर्भर करते हैं कि पुरुष अपनी पार्टनर को कितनी जल्दी और किस तरह सेक्स के प्रति लुभा सकता है. यह मूल्य एक बढ़िया सा गिफ्ट या फिर संबंध को आगे बढ़ाने के प्रतीक के रूप में दी गई अंगूठी भी हो सकती हैं. मुख्य तौर पर यह इस बात पर निर्भर करता है कि महिलाओं का स्वभाव और उनकी प्राथमिकता क्या है.

केथलीन का कहना है कि कुछ महिलाएं भौतिकवादी ज्यादा होती हैं तो उनके लिए पार्टी या गिफ्ट देने से काम चल सकता है, वहीं कुछ भावनात्मक स्वभाव की होती हैं, झूठी ही सही उन्हें प्रतिबद्धता देने से वह आपके लिए कुछ भी कर सकती हैं.

इस सर्वेक्षण को आगे बढाते हुए वैज्ञानिकों ने पाया कि 30 प्रतिशत से ज्यादा पुरुष अपने संबंध में सिर्फ सेक्स को ही अहमियत देते हैं. उनके लिए रोमांस करना या प्रेमिका की भावनाओं को महत्व देना कोई मायने नहीं रखता. वह अपने मंतव्यों को पूरा करने के लिए प्रेमिका से मिलते हैं.

ऐसे हालातों के मद्देनजर समाजशास्त्री मार्क रेगनिरस ने संभावना व्यक्त की है कि अगर आगे भी महिलाओं की यही सोच रही, तो निःसंदेह पुरुष प्रतिबद्ध संबंध को अहमियत नहीं देंगे. वैसे भी पुरुष संबंधों को लेकर लापरवाह होते हैं, महिलाओं की यह प्रवृत्ति उनके इस स्वभाव को और अधिक बढ़ावा देगी.

इस सर्वेक्षण को अगर हम भारतीय युवाओं की मानसिकता के आधार पर देखें तो इस बात को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता कि हमारे युवाओं पर भी आधुनिकता हावी हो गई है. परिवार के बड़े जहां विवाह पूर्व युवक और युवती का मिलना तक सहन नहीं करते, वहीं हमारा युवा वर्ग सारी सीमाएं लांघने को भी गलत नहीं समझता. किसी से प्रेम करना कोई गलत बात नहीं है, लेकिन उसे सिर्फ शारीरिक संबंधों की कसौटी पर परखना सही नहीं कहा जा सकता. पुरुष महिलाओं को भोग की वस्तु समझने लगे हैं. जिसका प्रयोग उनकी सहूलियत के हिसाब से किया जाता है.

जहां एक ओर कुछ महिलाएं प्रेम में धोखा खाती हैं, प्रेमी के प्रति समर्पित होने के बाद उनका प्रेमी उन्हें किसी और के लिए छोड़ जाता है, वहीं दूसरी ओर् कई महिलाएं ऐसी भी हैं जो भौतिकवादी वस्तुओं को प्रमुखता देती हैं. प्रेम नहीं वह अपने प्रेमी का उपयोग करती हैं, उनके पैसों को तरजीह देती हैं. फिर चाहे इसके एवज में उन्हें कुछ भी क्यों ना करना पड़े वह इसमें कोई परहेज नहीं करतीं. संबंध की दुहाई देते हुए वह बस अपने मंतव्य साध रहे होते हैं. ऐसी महिलाओं के लिए शारीरिक संबंध कोई बड़ी बात नहीं होते. ऐसे संबंध में जब महिला और पुरुष जिनमें किसी प्रकार की आपसी भावनाएं नहीं हैं, वह संबंध के टूटने का शोक नहीं मनाते बल्कि उपयोगिता अनुसार अन्य साथी की तलाश करते हैं. लेकिन इसका सीधा प्रभाव उन महिलाओं पर पड़ता है जो अपनी सीमाएं जानती हैं और वास्तव में अपने प्रेमी से भावनात्मक लगाव रखती हैं. पुरुषों को जब अपना मनचाहा विकल्प कहीं और मिल रहा होगा तो वह कब तक खुद को बांध कर रखेंगे. अपनी साथी की भावनाओं की परवाह किए बगैर वह संबंध समाप्त कर लेते हैं.

महिलाओं को अपनी उपयोगिता समझनी चाहिए. अगर आपका प्रेमी सिर्फ शारीरिक संबंध बनाने में ही रुचि रखता है तो यह बात स्पष्ट है कि आपकी जगह कोई भी ले सकता है. शारीरिक संबंध विवाह के पश्चात स्थापित किए जाए तो ही बेहतर है. प्रेम जैसी पवित्र भावना का मजाक बनाना किसी भी रूप में लाभकारी सिद्ध नहीं हो सकता. भौतिकवादी सुख-सुविधाओं को अपनी प्रमुखता समझना कुछ समय के लिए संतुष्टी जरूर दे सकता है लेकिन इसके दूरगामी परिणाम बेहद घातक हो सकते हैं.


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